नई दिल्ली। बजट 2016 में सातवें वेतन आयोग के लिए साफ तौर पर कोई प्रावधान नहीं होने से इस मामले में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों के बीच सरकार ने बुधवार को अपनी सफाई दी। सरकार ने कहा है कि विभिन्न मंत्रालयों के आवंटन में वेतन आयोग पर होने वाले खर्च को अंतरिम आवंटन के तौर पर शामिल किया गया है।
एक जनवरी, 2016 से होना है क्रियान्वयन
बजट डाक्यूमेंट में कहा गया है कि एक जनवरी, 2016 से क्रियान्वित होने वाली सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें फाइनेंशियल ईयर 2016-17 के दौरान लागू होंगी। डिफेंस सर्विसेज के लिए वन रैंक वन पेंशन स्कीम भी इसी दौरान लागू होनी है।
इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी ने दी सफाई
वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए आवंटित रकम की जानकारी दिए बगैर सरकार ने कहा कि इन मदों के लिए अतिरिक्त प्रावधान कर लिए गए हैं। इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी शक्तिकांत दास ने कहा कि वेतन आयोग के लिए आवंटित राशि की संख्या फिलहाल नहीं बताई जा सकती है, हालांकि विभिन्न मंत्रालयों के बजट में यह संख्या जुड़ी हुई है।
कमिटी ऑफ सेक्रेटरीज को देनी है अपनी सिफारिशें
उन्होंने कहा कि हम अभी यह नहीं बता सकते कि 2016-17 के दौरान हमें कितनी रकम की जरूरत होगी। ऐसा इसलिए है कि कमिटी ऑफ सेक्रेटरीज को पहले अपनी सिफारिशें देनी हैं। उसके बाद ही सरकार इस मामले में निर्णय लेगी और तब जाकर ही हम यह तय कर पाएंगे कि अगले फाइनेंशियल ईयर में इस मद में हमें कितने पैसे की जरूरत होगी।
एक लाख दो हजार करोड़ रुपए का आएगा बोझ
वेतन आयोग के क्रियान्वयन के मामले में सरकार पर एक लाख दो हजार करोड़ रुपए का बोझ आएगा। सेक्रेटरी ने कहा कि हमारे पास वेतन आयोग की सिफारिशें हैं और हमने संभावित जरूरतों का विश्लेषण भी किया है और उन्हें विभिन्न मंत्रालयों के बजट में शामिल किया गया है। इस मामले में उपयुक्त अंतरिम प्रावधान किया गया है।
दास ने कहा कि फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में इस मामले में अंतरिम प्रावधान करने का जिक्र किया था। एक दशक में अमूमन एक बार केंद्र सरकार के कर्मियों के वेतन में इजाफा होता है।
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